जीजा साली की चुदाई की कहानी : Jija and Saali Sex Stories

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Jija Saali ki mast Chudai

जीजा साली की चुदाई की कहानियाँ Sex Stories

जवानी में औरत के बिना जीवन गुजारना और ऊपर से एक बच्चे की परवरिश की जिम्मेदारी सचमुच बड़ा ही मुश्किल था. लेकिन छोटी साली कामिनी ने नवजात बच्चे को अपने छाती से लगा कर घर को काफही कुच्छ संभाल लिया. दीदी के गुजरने के बाद कामिनी अपनी मां के कहने पर कुच्छ दीनों के लिए मेरे पास रहने के लिए आ गयी थी. कामिनी तो वैसे ही खूबसूरत थी, बदन में जवानी के लक्षण उभरने से और भी सुंदर लगाने लगी थी. औरत के बिना मेरा जीवन बिलकुल सूना सूना सा हो चुका था.
लेकिन सेक्स की आग मेरे शरीर और मान में दिन पर दिन बढ़ती ही जा रही थी. राते गुजारना मुश्किल हो गया था. कभी कभी अपनी साली . कामिनी के कमसिन गोलाईयो को देख कर मेरा मान लालचाने लगता था. जैसा नाम वैसा ही उसका कमसिन जिस्म. कामिनी जो काम की अग्नि को बड़ा दे. मगर वो मेरी सगी साली थी यही सोच कर अपने मान पर काबू कर लेता था. फिर भी कभी कभी मान बेकाबू हो जाता और जी चाहता की . कामिनी को नंगी करके अपनी बाँहों में भर लू.उसके छोटी छोटी कसी हुए चूचीयओ को मुंह में भर कर देर तक चूसाता राहू और फिर उसे बिस्तर पर लेता कर उसकी नन्ही सी चुत में अपना मोटा लंड घुसा कर खूब चोद.
एक दिन मैं अपने ऑफिस के एक दोस्त के साथ एक इंग्लिश फिल्म देखने गया. फिल्म बहुत ज्यादा सेक्सी थी. नगञा और संभोग के डरशयो की भरमार थी. फिल्म देखते हुए मैं कई बार उत्तेजित हो गया था सेक्स का बुखार मेरे सर पर चढ़ कर बोलने लगा था. घर लौटते समय मैं फिल्म के चुदाई वाले सीन्स को बार बार सोच रहा था और जब भी उन्हें सोचता, कामिनी का चेहरा मेरे सामने आ जाता मैं बेकाबू होने लगा था.
मैंने मान बना लिया की आज चाहे जो भी हो, अपनी साली को छोड़ूगा जरूर. घर पहुंचने पर कामिनी ने दरवाजा खोला. मेरी नज़र सबसे पहले उसके भोले भाले मासूम चेहरे पर गयी फिर टी-शर्त के नीचे धाकी हुई उसकी नन्ही चूचियां पर और फिर उसके टांगों के बीच चड्धी में छुपी हुए छोटी सी मक्खन जैसी मुलायम बुर् पे. मुझे अपनी और अजीब नज़ारो से देखते हुए पकड़ . कामिनी ने पूच्छा,क्या बात हे जीजू, ऐसे क्यों देख रहे है?” मैंने कहा, “कुच्छ नहीं . कामिनी..बस ऐसे ही……

Jija Saali Indian Chudai

तबीयत कुच्छ खराब हो गई.” . कामिनी बोली. “अपने कोई दावा ली या नहीं?अभी नहीं” मैंने जबाब दिया और फिर अपने कमरे में जा कर लूँगी पहन कर बिस्तर पर लेट गया.थोड़ी देर बाद . कामिनी आई और बोली, “कुच्छ चाहिए जीजुजी मन में आया की कह दम “साली मुझे चोदने के लिए तुम्हारी चुत चाहिए.” पर मैं ऐसा कह नहीं सकता था.मैंने कहा “. कामिनी मेरे टांगों में बहुत दर्द है. थोड़ा तेल ला कर मालिश कर दो.” “ठीक है जीजू,” कह कर . कामिनी चली गयी और फिर थोड़ी देर में एक कटोरी में तेल लेकर वापस आ गयी. वो बिस्तर पर बैठ गयी और मेरे दाहिने टाँग से लूँगी घुटने तक उठा कर मालिश करने लगी
अपनी 19 साल की साली के नाज़ुक हाथों का स्पर्श पकड़ मेरा लंड तुरंत ही कठोर होकर खड़ा हो गया.थोड़ी देर बाद मैंने कहा, “. कामिनी ज्यादा दर्द तो जांघों में है. थोड़ा घुटने के ऊपर भी तेल मालिश कर दे.” “जी जीजू” कह कर . कामिनी ने लूँगी को जांघों पर से हटाना चाहा. तभी जानबूझ कर मैंने अपना बाया पैर ऊपर उठाया जिससे मेरा फुनफूनाया हुआ खड़ा लंड लूँगी के बाहर हो गया. मेरे लंड पर नज़र पड़ते ही . कामिनी सकपका गयी. कुच्छ देर तक वो मेरे लंड को कनखियो से देखती रही. फिर उसे लूँगी से ढकने की कोशिश करने लगी. लेकिन लूँगी मेरे टांगों से दबी हुई थी इसलिए वो उसे ढक नहीं पाई.
मैंने मौका देख कर पूछा, “क्या हुआ कामिनी? जी जीजू. आपका अंग दिख रहा है.” . कामिनी ने सकुचाते हुए कहा.अंग, कौन सा अंग?” मैंने अंजान बन कर पूच्छा.जब कामिनी ने कोई जवाब नहीं दिया तो मैंने अंदाज से अपने लंड पर हाथ रखते हुए कहा, “अरे! ये कैसे बाहर निकल गया?” फिर मैंने कहा, “साली जब तुमने देख ही लिया तो क्या शरमाना, थोड़ा तेल लगा कर इसकी भी मालिश कर दो.” मेरी बात सुन कर कामिनी घबरा गयी और शरमाते हुए बोली, “ची जीजू, कैसी बात करते है, जल्दी से ढाकिये इसे.” “देखो कामिनी ये भी तो शरीर का एक अंग ही है,तो फिर इसकी भी कुच्छ सेवा होनी चाहिए ना.तुम्हारी जीजी जब थी तो इसकी खूब सेवा करती थी, रोज इसकी मालिश करती थी. उसके चले जाने के बाद बेचारा बिलकुल अनाथ हो गया है.
तुम इसके दर्द को नहीं समझोगी तो कौन समझेगा?”, मैंने इतनी बात बारे ही मासूमियता से कह डाली.लेकिन जीजू, मैं तो आपकी साली हूँ. मुझसे ऐसा काम करवाना तो पाप होगा,ठीक है कामिनी, अगर तुम अपने जीजू का दर्द नहीं समझ सकती और पाप- पुण्या की बात करती हो तो जाने दो.” मैंने उदासी भरे स्वर में कहा.मैं आपको दुखी नहीं देख सकती जीजू. आप जो कहेंगे, मैं कारूगी.”
मुझे उदास होते देख कर कामिनी भावुक हो गयी थी.. उसने अपने हाथों में तेल चिपॉड कर मेरे खड़े लंड को पकड़ लिया. अपने लंड पर कामिनी के नाज़ुक हाथों का स्पर्श पकड़, वासना की आग में जलते हुए मेरे पूरे शरीर में एक बिजली सी दौड़ गयी. मैंने कामिनी की कमर में हाथ डाल कर उसे अपने से सटा लिया.बस साली, ऐसे ही सहलाती रहो. बहुत आराम मिल रहा है.” मैंने उसे पीठ पर हाथ फेरते हुए कहा.थोड़ी ही देर में मेरा पूरा जिस्म वासना की आग में जलाने लगा. मेरा मान बेकाबू हो गया. मैंने कामिनी की बाह पकड़ कर उसे अपने ऊपर खींच लीया. उसकी दोनों चूचियां मेरी छाती से चिपक गयी.
मैं उसके चेहरे को अपनी हथेलियो में लेकर उसके होठों को चूमने लगा. कामिनी को मेरा यह प्यार शायद समझ में नहीं आया.वो कसमसा कर मुझसे अलग होते हुए बोली. “जीजू ये आप क्या कर रहे है? कामिनी आज मुझे मत रोको. आज मुझे जी भर कर प्यार करने दो. लेकिन जीजू, क्या कोई जीजा अपनी साली को ऐसे प्यार करता है?”, कामिनी ने आश्चर्य से पूछा.साली तो आधी घर वाली होती है
और जब तुमने घर सम्हाल लिया है तो मुझे भी अपना बना लो. मैं औरो की बात नहीं जानता, पर आज मैं तुमको हर तरह से प्यार करना चाहता हूँ. तुम्हारे हर एक अंग को चूमना चाहता हूँ. प्लीज़ आज मुझे मत रोको कामिनी.” मैंने अनुरोध भरे स्वर में कहा.मगर जीजू, जीजा साली के बीच ये सब तो पाप है. कामिनी ने कहा. “पाप-पुण्या सब बेकार की बातें हैं साली. जिस काम से दोनों को सुख मिले और किसी का नुकसान ना हो वो पाप कैसे हो सकता है? ” मैंने अपना तर्क दीया.लेकिन जीजू, मैं तो अभी बहुत छोटी हूँ.” कामिनी ने अपना डर जताया.वह सब तुम मुझ पर चोद दो. मैं तुम्हें कोई तकलीफ नहीं होने दूँगा.” मैंने उसे भरोसा दिलाया.

जीजा साली – Hindi Sex Stories

कामिनी कुछ देर गुमासूमा सी बैठी रही तो मैंने पूछा. “बोलो साली, क्या कहती हो?ठीक है जीजू, आप जो चाहे कीजिए. मैं सिर्फ़ आपकी खुशी चाहती हूँ.” मेरी साली का चेहरा शर्म से लाल हो रहा था. कामिनी की स्वीकृति मिलते ही मैंने उसके नाज़ुक बदन को अपनी बाँहों में भींच लीया और उसके पतले पतले गुलाबी होठों को चूसने लगा. उसका विरोध समाप्त हो चुका था.
मैं अपने एक हाथ को उसके टी-शर्त के अंदर डाल कर उसकी छोटी छोटी चूचियां को हल्के हल्के सहलाने लगा. फिर उसके निप्पल को चुटकी में लेकर मसलने लगा. थोड़ी ही देर में कामिनी को भी मजा आने लगा और वो शी….शी. .ई.. करने लगी.मजा आ रहा है जीजू… आ… और कीजीए बहुत अच्छा लग रहा है.अपनी साली की मस्ती को देख कर मेरा हौसला और तरफ गया. हल्के विरोध के बावजूद मैंने कामिनी की टी-शर्त उतार दी और उसकी एक चूची को मुंह में लेकर चूसने लगा. दूसरी चूची को मैं हाथों में लेकर धीरे धीरे दबा रहा था. कामिनी को अब पूरा मजा आने लगा था. वह धीरे धीरे बुदबुदाने लगी. “ओह. आ… मजा आ रहा है जीजू..और ज़ोर ज़ोर से मेरी चूची को चूसिए..
अयाया…आपने ये क्या कर दिया?… ओह… जीजू.अपनी साली को पूरी तरह से मस्त होती देख कर मेरा हौसला तरफ गया. मैंने कहा. कामिनी मजा आ रहा है ना?हां जीजू बहुत मजा आ रहा है. आप बहुत अच्छी तरह से चूची चूस रहे है.” कामिनी ने मस्ती में कहा.अब तुम मेरा लंड मुंह में लेकर चूसो, और ज्यादा मजा आएगा.” मैंने कामिनी से कहा.ठीक है जीजू. ” वो मेरे लंड को मुंह में लेने के लिए अपनी गर्दन को झुकाने लगी तो मैंने उसकी बाह पकड़ कर उसे इस तरह लिटा दिया की उसका चेहरा मेरे लंड के पास और उसके चूतड़ मेरे चेहरे की तरफ हो गये. वो मेरे लंड को मुंह में लेकर आइसक्रीम की तरह मजे से चूसने लगी. मेरे पूरे शरीर में हे वॉल्टाजा का करंट दौड़ने लगा. मैं मस्ती में बड़बड़ाने लगा.हां कामिनी, हां.. शाबाश.. बहुत अच्छा चूस रही हो, ..और अंदर लेकर चूसो.” कामिनी और तेजी से लंड को मुंह के अंदर बाहर करने लगी.
मैं मस्ती में पागल होने लगा.मैंने उसकी स्कर्ट और चड्धी दोनों को एक साथ खींच कर टांगों से बाहर निकाल कर अपनी साली को पूरी तरह नंगी कर दिया और फिर उसकी टांगों को फैला कर उसकी चुत को देखने लगा. वाह! क्या चुत थी, बिलकुल मक्खन की तरह चिकनी और मुलायम. छोटे छोटे हल्के भूरे रंग के बाल उगे थे. मैंने अपना चेहरा उसकी जांघों के बीच घुसा दिया और उसकी नन्ही सी बुर् पर अपनी जीभ फेरने लगा.चुत पर मेरी जीभ की रगड़ से कामिनी का शरीर गणगाना गया. उसका जिस्म मस्ती में कापाने लगा. वह बोल उठी. “हाय जीजू…. ये आप क्या कर रहे है… मेरी चुत क्यों चाट रहे है…आ… मैं पागल हो जाऊंगी… ओह…. मेरे अच्छे जीजू… हाय… मुझे ये क्या होता जा रहा है..” कामिनी मस्ती में अपनी कमर को ज़ोर ज़ोर से आगे पीछे करते हुए मेरे लंड को चूस रही. उसके मुंह से थूक निकल कर मेरी जांघों को गीला कर रहा था. मैंने भी चाट-चाट कर उसकी चुत को थूक से तार कर दिया था. करीब 10 मिनट तक हम जीजा- साली ऐसे ही एक दूसरे को चूसाते चाटते रहे. हम लोगों का पूरा बदन पसीने से भीग चुका था. अब मुझसे सहा नहीं जा रहा था. मैंने कहा.
” कामिनी साली अब और बर्दाश्त नहीं होता. टू सीधी होकर, अपनी टांगे फैला कर लेट जा. अब मैं तुम्हारी चुत में लंड घुसा कर तुम्हें चोदना चाहता हूँ. मेरी इस बात को सुन कर कामिनी डर गयी. उसने अपनी टांगे सिकोड़ कर अपनी बुर् को छुपा लिया और घबरा कर बोली. “नहीं जीजू, प्लीज़ा ऐसा मत कीजिए.मेरी चुत अभी बहुत छोटी है और आपका लंड बहुत लंबा और मोटा है.मेरी बुर् फट जाएगी और मैं मर जाऊंगी. प्लीज़ इस ख्याल को अपने दिमाग से निकाल दीजिए.मैंने उसके चेहरे को हाथों में लेकर उसके होठों पर एक प्यार भरा चुंबन जड़ते हुए कहा. “डरने की कोई बात नहीं है कामिनी. मैं तुम्हारा जीजा हूँ और तुम्हें बहुत प्यार करता हूँ.
मेरा विश्वास करो मैं बारे ही प्यार से धीरे धीरे छोड़ुगा और तुम्हें कोई तकलीफ नहीं होने दूँगा.लेकिन जीजू, आपका इतना मोटा लंड मेरी छोटी सी बुर् में कैसे घुसेगा? इसमें तो उंगली भी नहीं घुस पति है.” कामिनी ने घबराए हुए स्वर में पूछा.इसकी चिंता तुम चोद दो कामिनी और अपने जीजू पर भरोसा रखो. मैं तुम्हें कोई तकलीफ नहीं होने दूँगा.” मैंने उसके सर पर प्यार से हाथ फेरते हुए भरोसा दिलाया.मुझे आप पर पूरा भरोसा है जीजू, फिर भी बहुत डर लग रहा है. पता नहीं क्या होने वाला है.” कामिनी का डर कम नहीं हो पा रहा था.
मैंने उसे फिर से धाँढस दिया. “मेरी प्यारी साली, अपने मान से सारा डर निकाल दो और आराम से पीठ के बाल लेट जाओ. मैं तुम्हें बहुत प्यार से चोदूंगा. बहुत मजा आएगा.ठीक है जीजू, अब मेरी जान आपके हाथों में है.” कामिनी इतना कहकर पलंग पर सीधी होकर लेट गयी लेकिन उसके चेहरे से भय साफ झलक रहा था. मैंने पास की ड्रेसिंग टेबला से वैसलीं की शीशी उठाई. फिर उसकी दोनों टांगों को खींच कर पलंग से बाहर लटका दिया.

जीजा साली की सेक्स स्टोरी

कामिनी डर के मारे अपनी चुत को जांघों के बीच दबा कर छुपाने की कोशिश कर रही थी. मैंने उन्हें फैला कर चौड़ा कर दिया और उसकी टांगों के बीच खड़ा हो गया. अब मेरा ताना हुआ लंड कामिनी की छोटी सी नाज़ुक चुत के करीब हिचकोले मर रहा था. मैंने धीरे से वैसलीं लेकर उसकी चुत में और अपने लंड पर चिपॉड ली ताकि लंड घुसाने में आसानी हो. सारा मामला सेट हो चुका था. अपनी कमसिन साली की मक्खन जैसी नाज़ुक बुर् को चोदने का मेरा बरसों पुराना ख्वाब पूरा होने वाला था.
मैं अपने लंड को हाथ से पकड़ कर उसकी चुत पर रगड़ने लगा. कठोर लंड की रगड़ खाकर थोड़ी ही देर में कामिनी की फुददी (क्लितोरिस) कड़ी हो कर टन गयी. वो मस्ती में कापाने लगी और अपने चूतड़ को ज़ोर ज़ोर से हिलाने लगी.बहुत अच्छा लग रहा है जीजू……. ओ..ऊ… ओ..ऊओह ..आ बहुत मजा आआअरहा है… और रगड़िए जीजू…तेज तेज रगड़िए…. ” वो मस्ती से पागल होने लगी थी और अपने ही हाथों से अपनी चूचियां को मसलने लगी थी. मुझे भी बहुत मजा आ रहा था. मैं बोला.मुझे भी बहुत मजा आ रहा है साली. बस ऐसे ही साथ देती रहो. आज मैं तुम्हें छोड़कर पूरी औरत बना दूँगा. ”
मैं अपना लंड वैसे ही लगातार उसकी चुत पर रगड़ता जा रहा था. वो फिर बोलने लगी. “हाय जीजू जी…ये आपने क्या कर दिया…ऊऊओ. .मेरे पूरे बदन में करंट दौड़ रहा है…….मेरी चुत के अंदर आग लगी हुई है जीजू… अब सहा नहीं आता.. ऊवू जीजू जी… मेरे अच्छे जीजू…. कुछ कीजिए ना.. मेरे चुत की आग बुझा दीजिए….अपना लंड मेरी बुर् में घुसा कर छोड़िए जीजू…प्लीज़. . जीजू…चोदो मेरी चुत को.लेकिन कामिनी, तुम तो कह रही थी की मेरा लंड बहुत मोटा है, तुम्हारी बुर् फट जाएगी. अब क्या हो गया?” मैंने यू ही प्रश्ना किया.ओह जीजू, मुझे क्या मालूम था की चुदाई में इतना मजा आता है.
आआआः अब और बर्दाश्ता नहीं होता.” कामिनी अपनी कमर को उठा-उठा कर पटक रही थी.हे जीजू…. ऊऊऊः… आग लगी है मेरी चुत के अंदर .. अब देर मत कीजिए…. अब लंड घुसा कर छोड़िए अपनी साली को… घुसेड़ दीजिए अपने लंड को मेरी बुर् के अंदर… फट जाने दीजिए इसको ….कुछ भी हो जाए मगर छोड़िए मुझे ” कामिनी पागलों की तरह बड़बड़ाने लगी थी. मैं समझ गया, लोहा गरम है इसी समय चोट करना ठीक रहेगा.
मैंने अपने फनफनाए हुए कठोर लंड को उसकी चुत के छोटे से छेद पर अच्छी तरह सेट किया. उसकी टांगों को अपने पेट से सटा कर अच्छी तरह जकड़ लिया और एक ज़ोर डर धक्का मारा.अचानक कामिनी के गले से एक तेज चीख निकली. “आआआआआआआः. ..बाप रीईईई… मर गयी मैं…. निकालो जीजू..बहुत दर्द हो रहा है….बस करो जीजू… नहीं चुदवाना है मुझे….मेरी चुत फट गयी जीजू… चोद दीजिए मुझे अब…मेरी जान निकल रही है.” कामिनी दर्द से बेहाल होकर रोने लगी थी. मैंने देखा, मेरे लंड का सुपाड़ा उसकी चुत को फाड़ कर अंदर घुस गया था. और अंदर से खून भी निकल रहा था.
अपनी दुलारी साली को दर्द से बिलबिलाते देख कर मुझे दया तो बहुत आई लेकिन मैंने सोचा अगर इस हालत में मैं उसे चोद दूँगा तो वो दुबारा फिर कभी इसके लिए राजी नहीं होगी. मैंने उसे हौसला देते हुए कहा. ” बस साली थोड़ा और दर्द सह लो. पहली बार चुदवाने में दर्द तो सहना ही पड़ता है. एक बार रास्ता खुल गया तो फिर मजा ही मजा है” मैं कामिनी को धीरज देने की कोशिश कर रहा था मगर वो दर्द से छटपटा रही थी.मैं मर जाऊंगी जीजू… प्लीज़ मुझे चोद दीजिए…बहुत ज्यादा दर्द हो रहा है.. प्लीज़ जीजू..निकाल लीजिए अपना लंड.” कामिनी ने गिड़गिदाते हुए अनुरोध किया. लेकिन मेरे लिए ऐसा करना मुमकिन नहीं था. मेरी साली कामिनी दर्द से रोती बिलखती रही और मैं उसकी टांगों को कस कर पकड़े हुए अपने लंड को धीरे धीरे आगे पीछे करता रहा. थोड़ी थोड़ी देर पर मैं लंड का दबाव थोड़ा बढ़ा देता था ताकि वो थोड़ा और अंदर चला जाए.

जीजा और साली की चुदाई

इस तरह से कामिनी तकरीबन 15 मिनता तक तड़पती रही और मैं लगातार धक्के लगाता रहा.कुछ देर बाद मैंने महसूस किया की मेरी साली का दर्द कुच्छ कम हो रहा था. दर्द के साथ साथ अब उसे मजा भी आने लगा था क्योंकि अब वो अपने चूतड़ को बारे ही ले-टाल में ऊपर नीचे करने लगी थी.उसके मुंह से अब कराह के साथ साथ सिसकारी भी निकालने लगी थी. मैंने पूछा. “क्यों साली, अब कैसा लग रहा है?
क्या दर्द कुछ कम हुआ?हां जीजू, अब थोड़ा थोड़ा अच्छा लग रहा है. बस धीरे धीरे धक्के लगाते रहिए. ज्यादा अंदर मत घुसाईएगा. बहुत दुखाता है.” कामिनी ने हांफते हुए स्वर में कहा. वह बहुत ज्यादा लास्ट पस्त हो चुकी थी.ठीक है साली, तुम अब छीनता चोद दो. अब चुदाई का असली मजा आएगा.” मैं हौले हौले धक्के लगाता रहा. कुछ ही देर बाद कामिनी की चुत गीली होकर पानी छोड़ लगी.मेरा लंड भी अब कुछ आराम से अंदर बाहर होने लगा. हर धक्के के साथ फॅक-फॅक की आवाज़ आनी शुरू हो गयी. मुझे भी अब ज्यादा मजा मिलने लगा था. कामिनी भी मस्त हो कर चुदाई में मेरा सहयोग देने लगी थी. वो बोल रही थी.
अब अच्छा लग रहा है जीजू, अब मजा आ रहा है.ओह जीजू..ऐसे ही चोदते रहिए. और अंदर घुसा कर छोड़िए जीजू..आ आपका लंड बहुत मस्त है जीजू जी. बहुत सुख दे रहा है. कामिनी मस्ती में बड़बड़ाए जा रही थी.मुझे भी बहुत आराम मिल रहा था. मैंने भी चुदाई की बढ़ता बढ़ा दी. तेजी से धक्के लगाने लगा. अब मेरा लगभग पूरा लंड कामिनी की चुत में जा रहा था मैं भी मस्ती के सातवें आसमान पर पहुंच गया और मेरे मुंह से मस्ती के शब्द फूटने लगे.हे कामिनी.मेरी प्यारी साली.मेरी जान..आज तुमने मुझ से चुदाया कर बहुत बड़ा उपकार किया है..हां..साली..तुम्हारी चुत बहुत टाइट है..बहुत मस्त है..तुम्हारी चूची भी बहुत कसी कसी है.श.बहुत मजा आ रहा है. कामिनी अपने चूतड़ उछाल-उछाल कर चुदाई में मेरी मदद कर रही थी. हम दोनों जीजा साली मस्ती की बुलंदियो को छू रहे थे.
तभी कामिनी चिल्लाई.जीजू.. मुझे कुछ हो रहा है..आ हह.जीजू.. मेरे अंदर से कुछ निकल रहा है..ऊहह..जीजू..मजा आ गया..हे..उई..मां.. कामिनी अपनी कमर उठा कर मेरे पूरे लंड को अपनी बुर् के अंदर समा लेने की कोशिश करने लगी. मैं समझ गया की मेरी साली का क्लाइमॅक्स आ गया है. वह झाड़ रही थी. मुझ से भी अब और सहना मुश्किल हो रहा था. मैं खूब तेज-तेज धक्के मर कर उसे चोदने लगा और थोड़ी ही देर में हम जीजा साली एक साथ स्खलित हो गये. बरसों से ईकात्ठा मेरा ढेर सारा वीर्य कामिनी की चुत में पिचकारी की तरह निकल कर भर गया. मैं उसके ऊपर लेट कर चिपक गया.
कामिनी ने मुझे अपनी बांहों में कस कर जकड़ लिया. कुछ देर तक हम दोनों जीजा-साली ऐसे ही एक दूसरे के नंगे बदन से चिपके हांफते रहे. जब सांसें कुछ काबू में हुई तो कामिनी ने मेरे होठों पर एक प्यार भर चुंबन लेकर पूछा. “जीजू, आज आपने अपनी साली को वो सुख दिया है जिसके बारे में मैं बिलकुल अंजान थी. अब मुझे इसी तरह रोज चोदीयेगा. ठीक है ना जीजू?” मैंने उसकी चूचियां को चूमते हुए जबाब दिया. “आज तुम्हें छोड़कर जो सुख मिला है वो तुम्हारी जीजी को छोड़कर कभी नहीं मिला.
तुमने आज अपने जीजू को तृप्त कर दिया.” वो भी बड़ी खुश हुई और कहने लगी आप ने मुझे आज बता दिया की औरत और मर्द का क्या संबंध होता है. वो मेरे सीने से चिपकी हुई थी और मैं उसके रेशमी ज़ुल्फो से खेल रहा था. मैंने साली से कहा मेरा लंड को पकड़ कर रखो. उसके हाथों के स्पर्श से फिर मेरा लंड खड़ा होने लगा, फिर से मेरे में काम वासना जागृत होने लगी.जब फिर उफहान पर आ गया तो मैंने अपनी साली से कहा पेट के बाल लेट जाओ. उसने कहा क्यों जीजू? मैंने कहा इस बार तेरी चूतड़ मारनी है.
वो सकपका गयी और कहने लगी कल मर लेना. मैंने कहा आज सब को मर लेने दो कल पता नहीं में रहूं किन आ रहूं. यह सुनते ही उसने मेरा मुंह बंद कर लिया और कहा “आप नहीं रहेंगे तो मैं जीकर क्या करूँगी”.
वो पेट के बाल लेट गयी. मैंने उसकी चूतड़ के होल पर वसलीन लगाया और अपने लंड पर भी, और धीरे से उसकी नाज़ुक चूतड़ के होल में डाल दिया. वो दर्द के मारे चिल्लाने लगी और कहने लगी “निकालिए बहुत दर्द हो रहा है”, मायने कहा सब्र करो दर्द थोड़ी देर में गायब हो जाएगा. उसकी चूतड़ फॅट चुकी थी और खून भी बह रहा था. लेकिन मुझपर तो वासना की आग लगी थी. मैंने एक और झटका मारा और मेरा पूरा लंड उसके चूतड़ में घुस गया. मैं अपने लंड को आगे पीछे करने लगा. उसका दर्द भी कम होने लगा. फिर हम मस्ते में खो गये. कुछ देर बाद हम झाड़ गये. मैंने लंड को उसके चूतड़ से निकालने के बाद उसको बांहों में लिया और लेट गया. हम दोनों काफी तक गये थे.बहुत देर तक हम जीजा साली एक दूसरे को चूमते-चाटते और बातें करते रहे और कब नींद के आगोश में चले गये पता ही नहीं चला. सुबह जब मेरी आँखें खुली मैंने देखा साली मेरे नंगे जिस्म से चिपकी हुई है. मैंने उसको डियर से हटा कर सीधा किया, उसकी फूली हुई चुत और सूजी हुई चूतड़ पर नज़र पड़ी, रात भर की चुदाई से काफी फूल गये थे. बिस्तर पर खून भी पड़ा था जो साली के चुत और चूतड़ से निकाला था. मेरी साली अब वर्जिन नहीं रही. नंगे बदन को देखते ही फिर मेरी काम अग्नि बाद गयी. धीरे से मैंने उसके गुलाबी चुत को अपने होठों से चूमने लगा. चुत पर मेरे मुंह का स्पर्श होते ही वो धीरे धीरे नींद से जगाने लगी, उसने मुझे चुत को बेतहाशा चूमता देख शर्म से आँखें बंद कर ली. समझ गयी फिर रात का खेल होगा फिर जीजा साली का प्यार होगा.
तो दोस्त कैसी लगी मेरी ये कहानी  “जीजा साली की मस्त चुदाई – jija saali ki  mast chudai” बताना न भूले.

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